News Summary
- अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की घोषणा की
- यह कदम एशियाई देशों को 90% तेल आयात पर असर डालेगा
- तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर चढ़ गई हैं
- ईरान के साथ तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार प्रभावित
अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की घोषणा ने विश्व बाजार में तेज उथल-पुथल मचा दी है। डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला खाड़ी में एक के बाद एक अजीबोगरीब फैसलों की लड़ाई का हिस्सा है। युद्ध से पहले प्रतिदिन करीब 150 जहाज होर्मुज से गुजरते थे। जो जहाज मार्च में गुजरे, उनके लिए ईरान की अनुमति ली गई थी।
यह नाकाबंदी ईरान से ज्यादा एशियाई देशों को भारी पड़ेगी। भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों का 90% तेल होर्मुज के रास्ते से आता है। अमेरिकी नौसेना को जलडमरूमध्य में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले किसी भी जहाज को रोककर उसकी जांच करनी होगी। ईरान को पारगमन शुल्क का भुगतान करने वाले जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ही रोक दिया जाएगा।
तेल की कीमतें और वैश्विक बाजार पर असर
इस नाकाबंदी के बाद तेल की कीमतें फिर 100 डॉलर से ऊपर चढ़ गई हैं। नई अनिश्चितताओं और फिर से बढ़ते तनावों के कारण बाजार में चिंता बढ़ गई है। जहाज ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि अमेरिकी सेना द्वारा नाकाबंदी शुरू करने के दौरान कई जहाज, जिनमें कुछ ईरानी बंदरगाहों पर खड़े जहाज भी शामिल थे, जलडमरूमध्य से होकर गुजरे थे। ट्रंप ने कहा था कि अन्य देश भी इस अभ्यास में शामिल होंगे, लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस जैसे नाटो सहयोगी देशों ने खुद को इससे अलग कर लिया हैै
Frequently Asked Questions
होर्मुज नाकाबंदी क्या है?
होर्मुज नाकाबंदी अमेरिका द्वारा किया गया एक कदम है जिसमें वह होर्मुज जलडमरूमध्य में आने-जाने वाले जहाजों को रोककर जांच करेगा।
यह भारत को कैसे प्रभावित करेगा?
भारत का 90% तेल आयात होर्मुज से होता है। नाकाबंदी के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और आपूर्ति में बाधा आ सकती है।
अमेरिकी नाकाबंदी कैसे लागू की जाएगी?
अमेरिकी नौसेना को जलडमरूमध्य में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले किसी भी जहाज को रोककर उसकी जांच करनी होगीै ईरान को पारगमन शुल्क का भुगतान करने वाले जहाजों को रोका जाएगाै





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